Bade Bhai Ne Bujayi Adhuri Pyas 2

Bade Bhai Ne Bujayi Adhuri Pyas 2

फिर मैं ऑटो से भैया के घर पहुँची। डोर बेल बजाई तो दरवाज़ा भैया ने खोला। भैया बानियान और लूँगी मे थे। मुझे देखका बोले अरे स्नेहा तुम अभी तो तुम्हारा ऑफीस टाइम है, यहाँ कैसे तो मैने कहा आज भाभी से मिलने की इच्छा हुई तो आ गयी और ऑफीस से छुट्टी ले ली लेकिन आप आज घर पर कैसे? मैने पूछा जवाब मे भैया ने बताया की तुम्हारी भाभी कई दिनों से मायके जाने की ज़िद कर रही थी, तो मैं उसे अभी-अभी छोड़कर आ रहा हूँ

मैने आज काम भी बंद कर दिया है, अरे तुम बाहर क्यों खड़ी हो अंदर आओ। भाभी नहीं है तो क्या हुआ भैया से बातें करो और मैं उदास मन से अंदर आई और सोफे पर बैठ गयी और भैया भी सामने बैठ गये फिर भैया ने कहा एक मिनट रूको मुझे एक दो फोन करने हैं मैं अभी आता हूँ।

फिर हम दोनो बैठकर ढेर सारी बातें करेंगे, मैने भैया से कहा भैया तब तक मैं नहा लेती हूँ। (क्योंकि अभी तक मेरे शरीर मे वासना की आग जल रही थी) और मैं नहाने चली गयी और नहाकर फिर से सोफे पर आकर बैठ गयी। जहाँ भैया बैठकर टीवी पर गाने देख रहे थे और मेरे आते ही उन्होने मुझसे पूछा और बताओ कैसा चल रहा है तो मैने कहा कुछ खास नहीं भैया।

भैया : एक बात बताओ स्नेहा अब तुम्हारी शादी की उम्र निकली जा रही है क्या तुम शादी नहीं करोगी।

मैं : नहीं भैया मैं अभी शादी के लिए तैयार नहीं हूँ।

भैया : सही समय मे शादी हो ही जाना चाहिए बाकी फिर तुम्हारी मर्ज़ी।

मैं : भैया एक बात बताओ क्या मेरे चेहरे पर ये मस्सा अच्छा नहीं लगता ?

भैया : हट पगली ये मस्सा तुम पर बहुत खिलता है, जैसे की बच्चे के चेहरे पर काला टीका पर आज तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो।

मैं : मेरे दोस्त कहते हैं की ये मुझ पर अच्छा नहीं लगता और इसे कटा लो।

भैया : अच्छा तुम्हारा कोई भरोसा भी नहीं है, तुम इसे कटा भी सकती हो, वैसे भी तुम जो भी चाहती हो कर लेती हो, इतना कहकर भैया अचानक सोफे से उठे और मेरे चेहरे को अपने हाथों से थामकर मेरे होठों के नीचे मेरे मस्से को किस करने लगे मैं हड़बड़ाकर बोली भैया मत करो ना प्लीज़, ये तुम क्या कर रहे हो। तो भैया ने कहा कल के दिन तुम इस मस्से को काट दोगी, इससे पहले मैं इसे जी भर कर चूम तो लूँ।

मैं भैया के पंजे से खुद को छुड़ाते हुए बोली ठीक है भैया मैं इसे नहीं कटाउंगी, ये कहते हुए मैने खुद को उनसे छुड़वाया, भैया ने मुझे अपने हाथो से आज़ाद करते हुए कहा तुम मुझे कितना चाहती हो मेरे कहने पर तुम ये मस्सा नहीं कटवा रही हो, क्या मैं तुम्हे एक बार किस कर लूँ? मैने कहा क्या इससे पहले किस करने से पहले पूछा था। ये सुनकर शायद भैया ने इसे मेरा खुला निमंत्रण समझा और मुझ पर टूट पड़े और मेरे चहरे को अपने दोनो हाथों से पकड़कर सोफे से उठाते हुए मेरे मस्से को छोड़कर अब सीधे मेरे होठों पर हमला कर दिया और मुझे अपनी छाती से चिपका लिया और जो आग मेरे अंदर लगी थी फिर से भड़कने लगी और इसी जोश मे मैने अपने हाथों को उनकी पीठ पर फेरने लगी कुछ देर ऐसे ही किस करते रहे फिर मैने खुद को संभाला और भैया से बोली भैया ये ग़लत है, आप मेरे सगे भाई है, जवाब मे भैया ने कहा भाई वहाँ पर ही भूल जा तू कब तक ऐसे ही अपनी जवानी को लेकर घूमती रहेगी मुझसे तेरी ये हालत नहीं देखी जाती है। अब जब तक तेरी शादी नहीं हो जाती तू मुझसे अपनी इच्छाओ की पूर्ति कर लिया कर और कौन सा हम सबके सामने ऐसा कर रहे है। इस बात का पता किसी को नहीं चलेगा ये बोलते हुए फिर से मुझे किस करने लगे और मैं भी उनका साथ देने लगी फिर भैया ने मेरी चुचियों को मुट्ठी भरकर ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगे और मैं मुहं से सिसकारियाँ निकालने लगी।

फिर भैया ने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए मेरे, शरीर पर सिर्फ़ पेंटी ही थी और भैया मुझे उठा कर बेडरूम मे लेकर गये और मुझे पलंग पर पटक दिया और खुद अपने कपड़े निकालने लगे जब भैया ने अपना अंडरवियर उतारा तो मैं उनका लंड देखकर में तो डर ही गयी, रोहित का लंड भैया के लंड के मुक़ाबले छोटा था और उसका लंड देखकर मुझे डर भी नहीं लगा था।

भैया के लंड को देख कर में सिहर गयी, मैने डरते हुए भैया से कहा भैया ये तो बहुत बड़ा है मुझे नहीं करवाना है। इस पर भैया बोले तू भी पागल है, कभी अपनी भाभी को देखा है, क्या वो तुम्हे दुखी लगती है, वो इसे पाकर ही तो इतनी खुश रहती है और तुम चिंता मत करो अभी में हूँ ना। ये कहकर वो भी पलंग पर चड़ गये और मेरे बूब्स को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगे मेरे मुहं से आ ऊहहाः की आवाज़ आने लगी और मैं भैया के लंड को अनदेखा करने लगी।

तभी भैया ने एक हाथ मेरी पेंटी के अंदर डाला और उनका हाथ मेरी चूत के आस पास के बालो पर घूमने लगे और भैया ने मेरी पेंटी उतार दी और मेरी चूत की और देखते हुए कहा क्यों स्नेहा क्या तुम अपने चूत के बाल को साफ नहीं करती हो। जवाब मे मैने कहा नहीं भैया ये सब मुझसे नहीं होता है। तो भैया ने कहा चलो आज मैं ही तेरे बाल साफ कर देता हूँ। मैने कहा भैया अगर कट गया तो? भैया ने कहा तुम चिंता मत करो तुम्हारी भाभी के भी मैं ही साफ करता हूँ। कुछ नहीं होगा और फिर भैया ने मुझे अपनी गोद मे उठाकर बाथरूम मे ले गये और वहाँ मुझे फर्श पर बिठाकर मेरी चूत के बाल मे खूब सारा साबुन लगाया और उस्तरे से मेरे सारे बाल साफ किये। बाल साफ करने के बाद मेरी चूत फूली हुई पवभाजी की तरह लग रही थी। जिससे कुछ बूंदे पानी की निकल रही थी। भैया ने मेरी चूत को हाथों से सहलाया और कहा स्नेहा तेरी चूत तो बहुत मस्त है।

भैया के मुहं से चूत शब्द सुनकर में शरमा गयी फिर मुझे गोद मे लेकर फिर से पलंग पर पटक दिया और मुझ पर चड़ कर मेरे निप्पल को अपने मुहं मे लेकर चूसने लगे बीच बीच मे वो अपने दातों से निप्पल को काट देते थे जिससे मैं चीख जाती थी अब भैया ने निप्पल चूसते हुए अपना एक हाथ मेरी चूत मे ले जाकर अपनी एक उंगली घुसा दी मैं भी चूतड़ उछालकर साथ देने लगी फिर भैया ने निप्पल को छोड़कर अपना मुहं मेरी चूत की तरफ लेकर गये और अपने दोनो हाथों से मेरी चूत के होठों को फैलाकर उसमे अपनी जीभ डाल दी। मेरे सारे शरीर पर मानो हज़ारों चीटियाँ दौड़ने लगी मैं उहाहहाहह ऊ मर गयी भैया और अंदर से जैसे शब्द निकालने लगी कुछ ही देर मे मेरा शरीर अकड़ने लगा मैं खत्म होने के कगार पर थी। भैया ने शायद इस बात को समझ लिया और मेरी चूत को चाटना छोड़ दिया फिर भैया ने अपने लंड की ओर इशारा करते हुए कहा इसे मुहं मे लो ना।

मैने कहा भैया बहुत बड़ा है मुहं दर्द करेगा भैया ने कहा जब मुहं दर्द करेगा तो निकाल लेना। मैने मजबूरी मे हाँ कर दी, फिर भैया ने अपना लंड मेरे होठ पर रख दिए और मैं उसे मुहं मे लेकर चूसने लगी। उनका लंड बड़ी मुश्किल से मेरे मुहं मे आ रहा था। कुछ देर मे भैया गरम हो गये और मेरे सर को पकड़कर मुख चुदाई (ओरल सेक्स) करने लगे, जिससे मेरी साँस अटकने लगी और मुझे खाँसी आने लगी मैं छुड़ाने की कोशिश करने लगी, पर भैया अपना लंड निकालने को तैयार ही नहीं थे।

बड़ी मुश्किल से मैने उनके लंड को अपने मुहं से बाहर निकाला और राहत की साँस ली फिर मैने भैया से कहा की भैया अब देर मत करो मुझसे रहा नहीं जा रहा है। ये सुनकर भैया तेल की शीशी ले आए और मेरे पैरो को फैलाकर उनके बीच बैठ गये और मेरी चूत को फैलाकर उसमे ढेर सारा तेल डाल दिया और तेल की शीशी को किनारे रखकर अपना लंड मेरी चूत मे सटा दिया और अपने दोनो हाथ मेरे कंधे पर रखकर एक झटका दिया जिससे मैं उछल गयी और उनका लंड फिसल गया। भैया ने फिर से अपना लंड चूत पर टिकाया और झटका मारा इस बार तेल के कारण लंड सरसरता हुआ चूत के पर्दे को फड़ता हुआ आधा अंदर घुस गया और में दर्द के मारे में चिल्ला उठी उईईईई माआ म्माआरररर दद्दला रे मेरे आँखो से आँसू आने लगे भैया ने मेरे बालों को अपने हाथों से प्यार से सहलाते हुए मेरे आँसू पोंछे और कहा बस एक बार और फिर तुम्हे भरपूर मज़ा मिलेगा पर मैं उनकी बात नहीं सुनना चाहती थी। मैं तो बस यही चाहती रही भैया प्लीज़ नहीं सहा जा रहा है, प्लीज़ उठ जाओ, इस बार भैया ने जैसे मेरी बात अनसुना करते हुए बिना किसी चेतावनी के एक और ज़ोर का झटका दिया ये हमला मेरे लिए खतरनाक था। इस बार पूरा लंड गंगनता हुआ चूत को फाड़कर पूरा अंदर चला गया। मुझे तो लगा कि मेरी साँस ही उखड़ गयी है। मुझे असहाय पीड़ा होने लगी थी।

मैं भैया को पीछे धकेलने की पूरी कोशिश किए जा रही थी और रोए जा रही थी और भैया समझाए जा रहे थे, कि जो दर्द होना था हो गया अब मज़ा आएगा, ये कहकर वो मेरे बूब्स को दबाने लगे और धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगे। कुछ ही देर बाद चमत्कारिक रूप से दर्द गायब हो गया और दुख सुख मे बदल गया और मुझे स्वर्ग की अनुभूति होने लगी और मैं गांड उछालकर भैया का पूरा साथ देने लगी और साथ ही साथ आआअहह की आवाज़ निकालने लगी थी।

कुछ ही देर के बाद में झड़ गयी पर भैया रुकने को तैयार ही नहीं थे। में तीन बार झड़ गयी फिर अचानक भैया ने स्पीड बढ़ा दी और भैया का शरीर अकड़ गया और उनके लंड से वीर्य की पिचकारी निकली, जिससे मेरी चूत भर गयी और दोनो निढाल हो गये कुछ देर बाद हम दोनो बिस्तर से उठे तो देखा बिस्तर मेरी चूत के खून से और भैया के वीर्य से सना हुआ था। मैने बिस्तर को बाथरूम में ले जाकर साफ किया और चूत पर लगे खून को साफ किया पीछे पीछे भैया आ गये तो मैने भैया के लंड को अपने हाथ से रगड़ कर धोया और भैया से कहा भैया तुमने वीर्य अंदर छोड़ दिया है अगर कुछ हो गया तो? तब भैया ने भाभी की एक टेबलेट लाकर दी और कहा इसे खा ले फिर कुछ नहीं होगा। मैंने टेबलेट खा ली और फिर बड़ी मुश्किल से लंगड़ाते हुए बेडरूम तक गयी। चुदाई से मेरा पूरा अंग अंग टूट रहा था। लेकिन मन मे एक सन्तुष्टि भी थी। मैने आज दुनिया की सारी खुशी कुछ ही समय मे पा ली थी और वो भी अपने सगे भाई से। में बेडरूम आकर मैं कपड़े पहनने लगी तो पीछे से भैया ने पकड़ लिया और कहा एक बार और हो जाए, तो मैने पलटकर मुस्कुराते हुए जवाब दिया, अभी नहीं मेरे भैया पहले मुझे सम्भलने तो दो तुमने तो मेरी हालत ही खराब कर दी है। कहकर मैं कपड़े पहनकर पलंग पर लेट गयी पर भैया पर अभी भी खुमारी छाई हुई थी और वो नंगे थे मेरी बगल मे मुझे बाहों में लेकर लेट गये और में भी इस पर मैं भी उनसे लिपट गयी।

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